अमलतास – Amaltas परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

अमलतास – Amaltas परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

अमलतास – Amaltas परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

अमलतास परिचय, (Amaltas Introduction)

भारत में इसके वृक्ष प्राय: सब प्रदेशों में मिलते हैं। तने की परिधि तीन से पाँच कदम तक होती है, किंतु वृक्ष बहुत उँचे नहीं होते। अप्रैल-मई में अमलतास के पेड़ों पर पीले-पीले फूल आते हैं। बसंत के फूल गर्मी तक रहते हैं। गर्मियों में झूमरों की तरह लटके हुए पीले फूलों के गुच्छे देखकर सभी वाह कह उठते हैं। आम तौर पर हर जगह पाए जाने वाले अमलतास के पेड़ों में इतने फूल आते हैं कि पत्ते नहीं दिखते हैं। फूल देखने में ही सुंदर नहीं होते, इतने गुण होते हैं कि हर रोग में ये काम आते हैं। इसके बीजों का भी औषधि के रूप में प्रयोग होता है। इस कारण इसे गोल्डन शॉवर ट्री, और इंडियन रेन इंडिकेटर ट्री भी कहा जाता हैं। शीतकाल में इसमें लगनेवाली, हाथ सवा हाथ लंबी, बेलनाकार काले रंग की फलियाँ पकती हैं। इन फलियों के अंदर कई कक्ष होते हैं जिनमें काला, लसदार, पदार्थ भरा रहता है। वृक्ष की शाखाओं को छीलने से उनमें से भी लाल रस निकलता है जो जमकर गोंद के समान हो जाता है। फलियों से मधुर, गंधयुक्त, पीले कलझवें रंग का उड़नशील तेल मिलता है।

आयुर्वेद में इस वृक्ष के सब भाग औषधि के काम में आते हैं। कहा गया है, इसके पत्ते मल को ढीला और कफ को दूर करते हैं। फूल कफ और पित्त को नष्ट करते हैं। फली और उसमें का गूदा पित्तनिवारक, कफनाशक, विरेचक तथा वातनाशक हैं फली के गूदे का आमाशय के ऊपर मृदु प्रभाव ही होता है, इसलिए दुर्बल मनुष्यों तथा गर्भवती स्त्रियों को भी विरेचक औषधि के रूप में यह दिया जा सकता है।

अमलतास – Amaltas विभिन्न भाषाओं में नाम :- 

अमलतास, गोल्डन शॉवर (Golden shower), सोनहाली, सोनाली (Sonali),कनियार (Kaniar), सियरलाठी इसका वानस्पातिक नाम कैसिया फिसट्युला (Cassia fistula) है।

अमलतास गुण – Amaltas in Medicinal Properties 

  आयुर्वेद में कहा गया है, इसके पत्ते मल को ढीला और कफ को दूर करते हैं। फूल कफ और पित्त को नष्ट करते हैं। फली और उसमें का गूदा पित्तनिवारक, कफनाशक, विरेचक तथा वातनाशक हैं फली के गूदे का आमाशय के ऊपर मृदु प्रभाव ही होता है, इसलिए दुर्बल मनुष्यों तथा गर्भवती स्त्रियों को भी विरेचक औषधि के रूप में यह दिया जा सकता है।

 

अमलतास – विभिन्न रोगों में उपचार (Amaltas in Treatment of various diseases)

           भारत की आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली में अमलतास का प्रयोग कब्ज, बुखार, पेट संबंधित समस्याओं और त्वचा के रोगों के विशेष रूप से किया जाता है।

बुखार के लिए :- अमलतास के फल के गूदे का उबालकर काढ़ा तैयार करें यह बुखार के लिए बहुत लाभकारी हैं दिन में तीन बार सेवन करें।

  • आप बुखार में अमलतास के अर्क का भी उपयोग कर सकते हैं।
  •  अमलतास की पत्तियों बुखार के इलाज के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। आप बुखार में इसका काढ़ा बना इस को उबालकर काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।
  • अमलतास के फल का मज्जा, हरीतकी, पिपली की जड़, कुटकी और नागरमोथा इन सब को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर पीएं इससे सभी प्रकार के बुखार उतर जाते हैं।

सर्दी जुकाम में :- सर्दी जुकाम में अमलतास की जड़ को जलाएं और इसके निकलने वाले धुएं को सुघंने से बहती नाक को ठीक करने में काफी मदद मिलेगी।

खांसी में :- अमलतास की गिरी 5 से 10 ग्राम को पानी में घुट लें और उसमें 3 गुना बुरा चीनी डाल गाढी चाशनी बनाकर चाटने से सूखी खांसी में आराम मिलता है।

गठिया रोग में :- अमलतास के फलियों और इसकी छाल के चूर्ण को उबालकर पीना चाहिए।

  • अमलतास की छाल, गिलोय और अडूसे के पत्तों को बराबर की मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर पिलाऐ।
  • अमलतास के पत्तों को सरसों के तेल में तलकर रख लें और इन्हें भोजन के साथ खाने से घुटनों का दर्द दूर होता है।
  • अमलतास के 10 से 15 पत्तों को गरम करके बांधने से सुन्नीवात गठिया में आराम होता है।

गले की सूजन और टांसिल में :- अमलतास की जड़ 10 ग्राम लेकर उसे 200 ग्राम पानी में उबालें अच्छी तरह काढा बनाने पर इसमें से एक एक चम्मच दिन में तीन बार सेवन करने से बहुत लाभ होगा।

  • अमलतास की छाल के काढ़े से गरारे करने पर भी गले की जलन और सूजन ठीक हो जाती है।

मुंह के छाले होने पर:- अमलतास के फल के मज्जे को धनिया के साथ पीस लें और इसमें कत्था मिलाकर चूस लें इससे मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।

गर्भवती स्त्रियां शरीर के स्ट्रेच मार्क्स को अमलतास से हटाएं :- अमलतास के पत्तों को दूध में पीस लें। इसे गर्भवती स्त्रियों के शरीर पर होने वाली धारियों पर लगाएं। इससे तुरंत फायदा होता है।

चमड़ी रोग में :- अमलतास के पत्तों को सिरके में पीसकर लेप बनाएं और उस लेप को दाद खाज खुजली फोड़ा फुंसी पर लगाने से आराम होता है।

  • इसका लेप करने से नवजात शिशु के शरीर पर होने वाली फुंसी और छाले आदि दूर हो जाते हैं।
  • अमलतास के पंचांग को पानी में पीसकर लेप बनाएं इस लेप को लगाने से भी दाद खाज फोड़े फुंसी पर लाभ होता है।

कब्ज पर :- अमलतास का गूदा 10 ग्राम और मुनक्का 10 ग्राम दोनों को मिलाकर खाने से दस्त साफ आता है।

  • अमलतास और इमली के गूदे को पीसकर रख लें और इसे सोने से पहले पीने से दस्त साफ आता है।
  • अमलतास के तीन से पांच पत्ते नमक और मिर्च मिलाकर खाने से पेट साफ होता है
  • अमलतास फल के 10 से 20 ग्राम गूदे को रात को पानी में भिगो दें और सुबह मसलकर छानकर पीने से पेट साफ होता है और पेट की गंदगी बाहर निकल जाती है।
  • अमलतास के फूलों का गुलकंद बनाकर खाने से भी पेट साफ रहता है।

दर्द सूजन पर :- अमलतास के पतियों को रगड़ कर उसका पेस्ट बनाकर आप दर्द सूजन के स्थान पर आप लगा सकते हैं ।

  • जख्म / घाव भरने में :- घाव भरने के लिए इसकी पत्तियों का रस निकालकर उसे जख्म / घाव पर लगायें।

चेहरे के दाग मिटाने के लिए:- अमलतास के पेड़ के फूलों को पीसकर इसका लेप बना लें इस लेप को आप अपने चेहरे पर लगाएं। आप इसे सप्ताह में कम से कम तीन चार बार अवश्य लगाएं इससे आपके चेहरे के सभी दाग खत्म हो जाएंगे।

मधुमेह में :- शुगर के लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए अमलतास की फलियों के गूद्दे का सेवन करना चाहिए प्रतिदिन सुबह-शाम 3 ग्राम  सेवन गुनगुने पानी के साथ करने से शुगर लेवल हमेशा के लिए कंट्रोल में रहता है।

  • अमलतास के फूलों को रात्रि के समय पानी में भिगो दें और सुबह छानकर पिया करें इससे डायबिटीज की बीमारी जड़ से ठीक हो जाती है।
  • अमलतास के गूदे को गर्म करके उसके गोलियां बना लें दो-दो गोली प्रतिदिन सुबह-शाम पानी के साथ लेने से मधुमेह में बहुत लाभ मिलता है।

बच्चों के पेट दर्द होने पर:- अमलतास के बीजों की गिरी को पानी में घिसकर नदी के आसपास लेप करने से बच्चों के पेट दर्द मैं बहुत आराम मिलता है।

बिवाई (एड़िया फटना) रोग में :- महिलाओं को पैर के एड़ियों के फटने पर अमलतास के पत्ते का पेस्ट बनाकर एड़ियों पर लगाएं। इससे एड़ी के फटने (बिवाई रोग) में लाभ होता है।

अस्थमा की शिकायत पर :- अमलतासके पत्तों को पीसकर 10 मिलीग्राम रस निकालें और उसे सुबह शाम नियमित एक महीने तक पीने से स्वास / अस्थमा में बहुत लाभ मिलता है।

अंडकोष वृद्धि में:- अमलतास की फली की 15 ग्राम गूद्दे को 100 ग्राम पानी में उबालें 25 ग्राम जब शेष रह जाए तो उसमें 25 ग्राम घी मिलाकर पीने से अंडकोष वृद्धि में आराम मिलता है।

पित्तज विकार में :-
अमलतास के फल के गूदा का काढ़ा बना लें। इसमें 5-10 ग्राम इमली का गूदा मिलाकर सुबह और शाम पिएं।

  • अमलतास फल के गूदा का काढ़ा बनाकर पिलाएं, या अमलतास फल के गूदा से पेस्ट बना लें। इसे दूध में पकाएं और पिएं।
  • अमलतास फल के गूदा और एलोवेरा के गूदे को जल के साथ घोट लें। इसका मोदक बना लें। इसे रात में सेवन करें।

वात विकार में :- अमलतास फल के गूदा को पिप्पली की जड़, हरीतकी, कुटकी एवं मोथा के साथ बराबर मात्रा में मिलाएं। इसका काढ़ा बनाकर पिएं। इससे वात संबंधित विकार में लाभ होता है।

सावधानी :
अगर आप किसी बीमारी के इलाज के लिए अमलतास का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें। 

Vedna-Mukti वेदना मुक्ति

हमारे संस्थान के द्वारा अश्वगंधा से निर्मित Vedna-Mukti वेदना मुक्ति औषधी घुटनो तथा जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस तथा घुटनो की ग्रीस कम होना, कमर में अकड़न, गठिया, आदि बीमारियों में अति उत्तम औषधि है।

Rato-Utswa रतोउत्सव

औषधि के सेवन से महिलाओं की माहवारी में रक्तस्राव, ल्यूकोरिया, गर्भधारण करने के लिए, शारीरिक कमजोरी, गुप्तांग की हर बीमारी एवम हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन ब्रेस्ट तथा योनि (Vagina ) को टाईट तथा सुडोल करने की दुनिया भर में प्रचलित दवाई है। यह दवाई ब्रेस्ट को जड़ से टाइट करती है। किसी भी कारण से ढीली हो चुकी योनी को भी टाईट कर देती है।

Please follow and like us:

Leave a Comment

Your email address will not be published.

0

TOP

X