अनंतमूल /Anantmool परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

अनंतमूल /Anantmool परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

अनंतमूल /Anantmool परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

अनंतमूल /सारिवा परिचय (Anantmool /Sariva Introduction)

अनंतमूल /सारिवा एक बेल है जो लगभग सारे भारतवर्ष में पाई जाती है।यह पेड़ों के ऊपर फैलती है। यह वर्षा ऋतु में हरी-भरी होती है। इसकी शाखाएँ लम्बी, चिकनी तथा पतली होती हैं। वर्षा की पहली बौछार से ही इसकी जड़ से नए अंकुरण होने लगते हैं।लता का रंग मालामिश्रित लाल तथा इसके पत्ते तीन चार अंगुल लंबे, जामुन के पत्तों के आकार के, पर श्वेत लकीरोंवाले होते हैं। इनके तोड़ने पर एक प्रकार का दूध जैसा द्रव निकलता है। फूल छोटे और श्वेत होते हैं। इनपर फलियाँ लगती हैं। इसकी जड़ गहरी लाल तथा सुगंधवाली होती है। यह सुगंध एक उड़नशील सुगंधित द्रव्य के कारण होती है, जिसपर इस औषधि के समस्त गुण अवलंबित प्रतीत होते है। औषधि के काम में जड़ ही आती है।
 

अनंतमूल /सारिवा विभिन्न भाषाओं में नाम :- 

 संस्कृत में अनन्तमूल, सारिवा, अल्पशारिवा, श्वेतसारिवा, गोपकन्या, गोपी, चन्दना, अनन्ता , गुजराती में दूरीवेल, उपलसरि, कावरवेल इत्यादि, हिंदी, बँगला और मराठी में अनंतमूल तथा अंग्रेजी में इंडियन सार्सापरिला कहते हैं।
वैज्ञानिक नाम :-  Ichnocarpus frutescens हैं।

अनंतमूल /सारिवा  के औषधीय गुण:-Anantmool /Sariva Medicinal Properties 

      अनंत मूल मधुर, चिकनी, वीर्यकर्ता, भारी अग्नि मंदता तथा प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली होती है। यह अरुचि, श्वास, जलन,  खांसी, आम विष, त्रिदोष, खुजली,रक्त विकार, प्रदर, ज्वर तथा अतिसार को नष्ट करने वाली है।

अनंतमूल /सारिवा विभिन्न रोगों में उपचार (Anantmool /Sariva in Treatment of various diseases)

गठिया रोग में :- अनंत मूल के चूर्ण की केवल 3 ग्राम की मात्रा शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ होता है।
ध्यान दें :- हमारे संस्थान के द्वारा अश्वगंधा से निर्मित Vedna-Mukti वेदना मुक्ति औषधी घुटनो तथा जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस तथा घुटनो की ग्रीस कम होना, कमर में अकड़न, गठिया, आदि बीमारियों में अति उत्तम औषधि है।
भूख ना लगना :- अनंत मूल के 3 ग्राम चूर्ण को प्रकाश में दूध के साथ सेवन करने से भूख लगना शुरू हो जाता है।
 बुखार में :- अनंत मूल, सौठ, कुटकी और नागर मोथा के साथ बराबर की मात्रा में काढ़ा को सिद्ध करके पिलाने से सभी प्रकार के बुखार  बुखार दूर होते हैं।
 
  • अनंतमूल की जड़ का 2 ग्राम चूर्ण, चुना और कथा लगे पान में रखकर खाने से भी आराम मिलता है।
 पेट दर्द में:-  पेट दर्द में अनंत मूल  को 2- 3 ग्राम की मात्रा को पानी के साथ बैठ कर पीने से पेट दर्द ठीक होता है।
खूनी दस्त :- अनंतपुर का चूर्ण, सौठ,  गेंद और थोड़ी सी अफीम लेकर दिन में दो बार सेवन करने से खूनी दस्त बंद हो जाते हैं।
 पथरी रोग में :- पथरी में सारिवा मूल के 5 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध के साथ दिन में दो या तीन बार सेवन करने से पथरी गल कर निकल जाती है।
दाह ( जलन) में :- अनंत मूल चूर्ण को घी में भूनकर 1 ग्राम तक का चूर्ण शक्कर के साथ कुछ दिन तक सेवन करने से चेचक, टाइफाइड आदि  के बाद शरीर में होने वाली गर्मी और जलन दूर हो जाती है।
 दांतों के रोग में :-अनंत मूल के पत्तों को पीसकर दांतों के नीचे दबा कर रखने से दांत का दर्द ठीक हो जाता है।
 स्तन की सूजन:- अनंत मूल का चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से स्तन की सूजन ठीक हो जाती है।
 और स्तनों में दूध की मात्रा को बढ़ा देता है जिन महिलाओं के बच्चे बीमार और कमजोर हो उन्हें अनंतमूल का सेवन अवश्य करना चाहिए।
 गर्भपात में :- गर्भपात में अनंतमूल का काढ़ा तैयार कर उसमें दूध और मिश्री मिलाकर सेवन करने से गर्भपात होने का डर नहीं रहता। गर्भधारण हो जाने के बाद से प्रसव काल तक नियमित देने से बच्चा रोगमुक्त और सुंदर उत्पन्न होगा।
बच्चों में सूखा रोग पर:- अनंतमूल की जड़  और वायबडिंग के चूर्ण को बराबर की मात्रा में मिलाकर आधा चम्मच सुबह-शाम सेवन कराने से बच्चों का सूखा रोग दूर हो जाता है।
पेशाब में जलन :- अनंतमूल की जड़ को केले के पत्ते में लपेटकर आग में भूनकर रख दें जब पता जल जाए तो जड़ को निकालकर भुने हुए जीरे और चीनी के साथ पीसकर गाय का घी मिलाकर सुबह-शाम देने से पेशाब और वीर्य संबंधी सभी रोग दूर हो जाते हैं।
पेशाब के साथ खून आना :- अनंतमूल की जड़ का चूर्ण  को गिलोय और जीरा के साथ नियमित सेवन करने से पेशाब के साथ खून आना बंद हो जाता है।
 गंजापन :- अनंत मूल की केवल 2 ग्राम की मात्रा दिन में दो या तीन बार पानी के साथ सेवन करने से गंजापन अवश्य दूर होता है।
दमा में :-  अनंत मूल 4 ग्राम, अडूसा पत्र 4 ग्राम दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने सेलाभ होता है।
पीलिया में :- अनंतमूल की जड़ की छाल 2 ग्राम और काली मिर्च के 11 दाने दोनों को 25 ग्राम पानी के साथ पीसकर 1 सप्ताह तक पीने से आंखों पर शरीर का पीलापन दूर हो जाता है और पीलिया रोग से पैदा होने वाली बहुत सी बीमारियां नष्ट हो जाती हैं।
 दाद में:- अनंत मूल के चूर्ण को घी में भूनकर 1 ग्राम चीनी में  मिला कर नियमित सेवन करे।
आंखों के रोग में :- अनंतमूल की जड़ को  पानी में घिसकर नेत्र में अंजन की भाँति लेप करने से आंखों की सूजन कम हो जाती है।
अनंतमूल के पत्तों की रात को कपड़े में छानकर शहद के साथ नेत्रों पर लेप करने से भी आंखों की सूजन कम हो जाती है।
अनंत मूल के ताजे पत्ते तोड़ने से जो दूध निकलता है उसको भी शहद में मिलाकर आंखों में लेप करने से नेत्र के रोगों में लाभ होता है।
रक्त विकार में :-  अनंत मूल 30 ग्राम को जौकुट कर 1 लीटर पानी में पका ले और इसे छानकर उचित मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से रक्त विकार दूर होते हैं
 
  • पीपल की छाल और अनंत मूल दोनों को काढ़ा बनाकर पीने से दाद खाज खुजली आदि विकारों में लाभ होता है जीरा और अनंत मूल का चूर्ण एक चम्मच काढ़ा बनाकर पी है अनंतमूल की जड़ का चूर्ण 1 ग्राम वाइब्रेटिंग 1 ग्राम दोनों को पीसकर देने से अधिक गंभीर बच्चे भी नवजीवन पा जाते हैं

सावधानी :
अगर आप किसी बीमारी के इलाज के लिए अनंतमूल का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें। 

Vedna-Mukti वेदना मुक्ति

हमारे संस्थान के द्वारा अश्वगंधा से निर्मित Vedna-Mukti वेदना मुक्ति औषधी घुटनो तथा जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस तथा घुटनो की ग्रीस कम होना, कमर में अकड़न, गठिया, आदि बीमारियों में अति उत्तम औषधि है।

Rato-Utswa रतोउत्सव

औषधि के सेवन से महिलाओं की माहवारी में रक्तस्राव, ल्यूकोरिया, गर्भधारण करने के लिए, शारीरिक कमजोरी, गुप्तांग की हर बीमारी एवम हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन ब्रेस्ट तथा योनि (Vagina ) को टाईट तथा सुडोल करने की दुनिया भर में प्रचलित दवाई है। यह दवाई ब्रेस्ट को जड़ से टाइट करती है। किसी भी कारण से ढीली हो चुकी योनी को भी टाईट कर देती है।

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