अश्वगंधा Aswghanda – परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

अश्वगंधा Aswghanda – परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

परिचय :- 

अश्वगंधा (Withania somnifera) एक पौधा (क्षुप) है। यह विदानिया कुल का पौधा है। विदानिया की विश्व में 10 तथा भारत में 2 प्रजातियाँ पायी जाती हैं।
भारत में पांरपरिक रूप से अश्वगंधा आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में प्रयोग किया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पौधा है। इसकी ताजा पत्तियों तथा जड़ों में घोड़े की मूत्र की गंध आने के कारण ही इसका नाम अश्वगंधा पड़ा।

अश्वगंधा के पौधे सीधे, अत्यन्त शाखित, सदाबहार तथा झाड़ीनुमा 1.25 मीटर लम्बे पौधे होते हैं। पत्तियाँ रोमयुक्त, अण्डाकार होती हैं। फूल हरे, पीले तथा छोटे एंव पाँच के समूह में लगे हुये होते हैं। इसका फल बेरी जो कि मटर के समान दूध युक्त होता है। जो कि पकने पर लाल रंग का होता है। जड़े 30-45 सेमी लम्बी 2.5-3.5 सेमी मोटी मूली की तरह होती हैं। इनकी जड़ों का बाह्य रंग भूरा तथा यह अन्दर से सफेद होती हैं।

अश्वगंधा के गुण :- 

आयुर्वेद मे अश्वगंधा को मेध्य रसायन भी कहते है जिससे हमारी दिमाग की यादास्त तथा एकाग्रता बढाने के लिए उपयोग किया जाता है आयुर्वेद में अश्वगंधा को रसायन माना जाता है, जिसका उपयोग शारीरिक क्षमता बलवर्द्धन,आरोग्यवृद्धि, यौनक्षमता में वृद्धि और शरीर में प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए होता है। इसलिए कुछ लोग इसे भारतीय जिनसेंग कहते हैं। चीन में जिनसेंग का इस्तेमाल यौनक्षमता में वृद्धि के लिए किया जाता है। अश्वगंधा के फल, पत्तियों, जड़ों और बीजों का इस्तेमाल यौनक्षमता में वृद्धि, मूत्रोत्पादक और स्मृति क्षय के ईलाज के लिए वर्षों से होता रहा है। आरोग्यवृद्धि में किया आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसकी जड़ और फलों का इसका प्रयोग होता है। इसमें एण्टी टयूमर एंव एण्टी वायोटिक गुण भी पाया जाता है।नींद न आने की बीमारी में अश्वगंधा आपके लिए एक प्रभावशाली दवा की तरह काम करता है इसके सेवन से आप चैन की नींद पा सकते है।

अश्वगंधा के चमत्कारी औषधीय गुण :-

वजन कम करने में :- अश्वगंधा के 10-11 पत्ते धोकर रोज खाली पेट खाने से शरीर की फालतू चर्बी और वजन कम होता है।

सफेद बाल की समस्या में :-अश्वगंधा चूर्ण 2-4 ग्राम का सेवन करें। समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या में लाभ होगा।
सीने के दर्द में :- अश्‍वगंधा की जड़ का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा का जल के साथ सेवन करें। इससे सीने के दर्द में लाभ होता है।
कब्‍ज की समस्या में :- अश्वगंधा चूर्ण 2 ग्राम को गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से कब्‍ज की परेशानी से छुटकारा मिलता है।
गले के रोग (गलगंड) में :- अश्वगंधा के फायदे के कारण और औषधीय गुणों के वजह से अश्वगंधा गले के रोग में लाभकारी सिद्ध होता है।
पसली दर्द:- अश्वगंधा, बहेड़ा चूर्ण व गुड़ मिलाकर आधे ग्राम की गोली बना लें इसे खाने से छाती, पसलियों और हृदय की मांसपेशियों के दर्द में लाभ होता है।
पेट की बीमारी में :- अश्‍वगंधा चूर्ण में बराबर मात्रा में बहेड़ा चूर्ण मिला लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में गुड़ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े खत्म होते हैं।

  • अश्‍वगंधा चूर्ण चौथाई चम्मच में गिलोय का चूर्ण चौथाई चम्मच मिला लें। इसको शहद के साथ मिला कर नियमित सेवन करें। इससे पेट के कीड़ों का उपचार होता है।

आंखों की ज्‍योति बढ़ाए :- अश्‍वगंधा 2 ग्राम, आंवला 2 ग्राम और 1 ग्राम मुलेठी 1 ग्राम को आपस में मिलाकर, पीसकर अश्वगंधा चूर्ण कर लें। सुबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से आंखों की रौशनी बढ़ती है।

  • एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को सबह और शाम पानी के साथ सेवन करने से आंखों की रौशनी बढ़ती है।

गण्डमाला-गलगंड में :-  अश्‍वगंधा चूर्ण तथा पुराने गुड़ को बराबार मात्रा में मिलाकर वटी बना लें। इसे सुबह-सुबह जल के साथ सेवन करें। साथ ही अश्‍वगंधा के पत्‍ते का पेस्‍ट तैयार करें। इसका गण्डमाला पर लेप करें। इससे गलगंड में लाभ होगा।

टीबी रोग में :- अश्‍वगंधा चूर्ण 1चम्मच की मात्रा को असगंधा के ही काढ़े से सेवन करें। इससे टीबी में लाभ होता है। अश्‍वगंधा की जड़ से चूर्ण 2 चम्मच लें और इसमें 1 चम्मच बड़ी पीपल का चूर्ण, 5 चम्मच घी और 5 चम्मच शहद मिला लें। इसका सेवन करने से टीबी (क्षय रोग) में लाभ होगा।

खांसी के रोग में :- असगंधा 10 ग्राम, मिश्री 10 ग्राम 400 मिलीग्राम पानी में पकाएं। जब इसका आठवां हिस्सा रह जाए तो आंच बंद कर दें। इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से कुकुर खांसी या वात से होने वाले कफ की समस्या में विशेष लाभ होगा।

  • 50 ग्राम असगंधा के पत्तों का गाढ़ा काढ़ा बना लें। इसमें 20 ग्राम बहेड़े का चूर्ण, 10 ग्राम कत्था चूर्ण, 5 ग्राम काली मिर्च तथा ढाई ग्राम सैंधा नमक मिला कर गोलियां बना लें। इन गोलियों को चूसने से सब प्रकार की खांसी दूर होती है। टीबी के कारण से होने वाली खांसी में भी यह विशेष लाभदायक है।

स्त्री रोग में :- अश्वगंधा चूर्ण व मिश्री एक चम्मच सुबह-शाम लेने से माहवारी में रक्त स्राव कम होता है।

ल्यूकोरिया में :-अश्‍वगंधा, तिल, उड़द, गुड़ तथा घी को समान मात्रा में लें। इसे लड्डू बनाकर खिलाने से भी ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

  • असगंधा की जड़ के चूर्ण में मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

स्त्री रोग में :- अश्वगंधा चूर्ण व मिश्री एक चम्मच सुबह-शाम लेने से माहवारी में रक्त स्राव कम होता है।
ल्यूकोरिया में :-अश्‍वगंधा, तिल, उड़द, गुड़ तथा घी को समान मात्रा में लें। इसे लड्डू बनाकर खिलाने से भी ल्यूकोरिया में लाभ होता है।
असगंधा की जड़ के चूर्ण में मिश्री मिलाकर गाय के दूध के साथ सुबह और शाम सेवन करने से ल्यूकोरिया में लाभ होता है।

गर्भधारण करने में अश्‍वगंधा के प्रयोग से लाभ :- अश्वगंधा चूर्ण को गाय के घी में मिला लें। मासिक-धर्म स्‍नान के बाद हर दिन गाय के दूध के साथ एक चम्मच की मात्रा का सेवन लगातार एक माह तक करें। यह गर्भधारण में सहायक होता है।

  • अश्वगंधा चूर्ण क गाय के दूध में पकाएं। जब इसमें केवल दूध बचा रह जाय तब इसमें मिश्री और गाय का घी मिला कर लें। इसका प्रयोग मासिक धर्म के शुद्धिस्नान के तीन दिन बाद, केवल तीन दिन तक सेवन करने से यह गर्भधारण में सहायक होता है।

Rato-Utswa रतोउत्सव

महिलाओं को संपूर्ण शक्ति प्रदान करे, हाथ पैरों का सोना दूर करे, गुप्तांग की हर बीमारी एवम हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन ल्यूकोरिया को तुरंत ठीक कर के सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करे।

गठिया में :- एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को सुबह और शाम गर्म दूध से ले। इससे कमर दर्द और नींद न आने की समसया में भी लाभ होता है।

  • इसके जड़ सहित पौधे को धोकर कूट लें, इससे निकला रस 25 से 50 ग्राम सुबह-शाम पीने से गठिए में आराम होता है।
  • असगंधा के 30 ग्राम ताजा पत्तों को, 300 ग्राम पानी में उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो छानकर पी लें। एक सप्ताह तक सेवन करने से कफ से होने वाले वात तथा गठिया रोग में लाभ होगा। इसका लेप भी लाभदायक है।

Vedna-Mukti वेदना मुक्ति

हमारे संस्थान के द्वारा अश्वगंधा से निर्मित Vedna-Mukti वेदना मुक्ति औषधी घुटनो तथा जोड़ों के दर्द, अर्थराइटिस तथा घुटनो की ग्रीस कम होना, कमर में अकड़न, गठिया, आदि बीमारियों में अति उत्तम औषधि है।

इंद्रिय दुर्बलता (लिंग की कमजोरी) :- असगंधा चूर्ण उतनी ही मात्रा में खांड मिलाकर रख लें। एक चम्मच की मात्रा में लेकर गाय के ताजे दूध के साथ सुबह में सेवन करें।

  • असगंधा, दालचीनी और कूठ को बराबर मात्रा में मिलाकर कूटकर छान लें। इसे गाय के मक्खन में मिलाकर सुबह और शाम शिश्‍न (लिंग) के आगे का भाग छोड़कर शेष लिंग पर लगाएं। थोड़ी देर बाद लिंग को गुनगुने पानी से धो लें। इससे लिंग की कमजोरी या शिथिलता दूर होती है।

शारीरिक कमजोरी ;- अश्‍वगंधा चूर्ण एक चम्मच को एक वर्ष तक दूध से सेवन करने से शरीर रोग मुक्‍त तथा बलवान हो जाता है।

  • सफेद मूसली, अश्वगंधा व मिश्री का चूर्ण सुबह-शाम गर्म दूध के साथ लेेने से पुरुषों की शारीरिक क्षमता में वृद्धि व मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • अश्‍वगंधा चूर्ण, तिल व घी बराबर मात्रा में लें। इसमें शहद मिलाकर सर्दी के दिनों में प्रतिदिन एक चम्मच की मात्रा में सेवन करने से शरीर मजबूत बनता है।
  • असगंधा चूर्ण में उतने ही भाग मिश्री, शहद, गाय का घी मिलाएं। इस मिश्रण को एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम शीतकाल में 4 महीने तक सेवन करने से शरीर मजबूत होता है।
  • 50 ग्राम असगंधा चूर्ण, तिल 100 ग्राम और उड़द 400 ग्राम लें। इन तीनों को महीन पीसकर इसके बड़े बनाकर ताजे-ताजे एक महीने तक सेवन करने से शरीर की दुर्बलता खत्‍म हो जाती है।
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सिरजन Sirjan

हमारे संस्थान के द्वारा अश्वगंधा से निर्मित सिरजन Sirjan औषधि के सेवन से नए पुराने सब प्रकार के प्रमेह रोगों में लाभ होता है। बलवर्द्धक, कांति वर्धक, पुष्टिकारक, धातुपोषक, वाजीकरण, मर्दाना कमजोरी, शीघ्रपतन, शुक्राणु की कमी, अनिच्छा, थकावट विकारों में यह उपयोगी है बहुत ही उपयोगी हैं।

चोट लगने पर :- अश्वगंधा चूर्ण में हल्दी तथा गुड़ मिला लें। इसे दूध के साथ सेवन करने से शस्‍त्र के चोट से होने वाले दर्द में अवश्य आराम मिलता है।

रक्त विकार में :- अश्वगंधा चूर्ण में बराबर मात्रा में चोपचीनी चूर्ण या चिरायता का चूर्ण मिला लें। इसे की एक चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से खून में होने वाली समस्‍याएं ठीक होती हैं।

  • अश्‍वगंधा के पत्‍तों का पेस्‍ट तैयार कर लें। इस लेप को या अश्‍वगंधा के ही पत्‍तों के काढ़े से धोने से त्वचा में लगने वाले कीडों से आराम मिलता है। मधुमेह से होने वाले घाव तथा अन्‍य प्रकार के घावों में भी लाभदायिक है।

बुखार में :- अश्‍वगंधा चूर्ण तथा गिलोय सत् को मिला लें। इसे हर दिन शाम को गुनगुने पानी के साथ खाने से पुराना बुखार ठीक होता है।

विभिन्न औषधियाँ :-
अश्वगंधारिष्ट
अश्वगंधाघृत
अश्वगंधा चूर्ण
अश्वगंधा अवलेह
सौभाग्य शुन्ठी पाक
सुकुमारघृत
महारास्नादि योग

अश्वगंधा का सही डोज़ न लेने से आपको उल्टी और जी मिचलाने जैसी समस्याएं हो सकती है।अश्वगंधा का ज्यादा प्रयोग आपके लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. अश्वगंधा के ज्यादा इस्तेमाल से आपको बुखार, थकान, दर्द की शिकायत भी हो सकती है।

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