फिटकरी परिचय, गुण धर्म और सेवन के औषधीय प्रयोग।

फिटकरी परिचय, गुण धर्म और सेवन के औषधीय प्रयोग।

परिचय :-  हम लोग बरसों से देखते आए है। हमारे पिताजी या दादाजी फिटकरी को शेव करने के बाद दाढ़ी पर मलते थे। जिससे उनका चेहरा हमेशा दमकता हुआ और झुर्रियों रहित रहता था। ये फिटकरी का कमाल था।वैसे तो फिटकरी को एलम के नाम से भी पुकारते हैं। इसको अन्य कई नामों से भी पुकारा जाता है जैसे की पर्ल एलम, केक एलम, फिल्टर एलम, पिकल एलम इत्यादि-इत्यादि  फिटकरी का रासायनिक नाम : पौटेशियम एल्यूमीनियम सल्फेट । फिटकरी का रासायनिक सूत्र : KAl(SO4)2·12H2O आइये जाने फिटकरी क्या काम आती है 

फिटकरी के गुण :- फिटकरी में कई प्रकार के औषधीय गुण होते है। फिटकरी आमतौर पर सब घरों में प्रयोग होती है। यह लाल व अफ़ेद दो प्रकार की होती है। अधिकतर सफ़ेद फिटकरी का प्रयोग ही किया जाता है। यह संकोचक अर्थात सिकुड़ना पैदा करने वाली होती है। फिटकरी में और भी बहुत गुण होते हैं। इसमें चोट लगने पर खून बहना बंद करने का विशेष गुण होता है तथा साथ ही ये एंटीसेप्टिक और एंटी बैक्टीरियल की तरह काम करती है । इन्ही गुणों की वजह से इसे शेविंग के बाद दाढ़ी पर मलते है। आज भी गावों में यही परम्परा है। गंदे पानी में फिटकरी डालने से पानी की गंदगी अलग हो जाती है। ये सामान्य उपयोग लगभग सभी जानते है। लेकिन इसके गुण यहीं तक सीमित नहीं हैं ।

फिटकरी का औषधीय प्रयोग

 नकसीर (नाक से खून निकलना) में :– गाय का दूध एक प्लेट में डालें तथा उसमें पिसी फिटकरी डालकर बार-बार रोगी को सुंघाये।
पायोरिया तथा अन्य तकलीफें :– यदि मसूड़े कमजोर हैं, खून निकलता है। व दाँत खराब हैं तथा हिलते हैं, मसूड़ों में सूजन है और दर्द भी होता है, तो ऐसे में मसूड़ों पर फिटकरी का बारीक पाउडर धीरे-धीरे मलें। यह हल्की मालिश मसूड़ों से जुड़े सभी रोगों तथा पायोरिया आदि को ठीक कर देगा। कुछ समय तक नियमित करें और फिटकरी की मात्रा जरा-सी लें, अधिक नहीं।
 उँगलियों की सूजन :– यदि उँगलियों में ठंड के कारण या ठंडे पानी के कारण सूजन हो जाए तो पानी उबालकर, उसमें थोड़ी (1/4 चम्मच) फिटकरी डालें व उसमें हाथ डुबोएँ तथा हाथ धोएँ। उँगलियों को सेंक दें, उँगलियों की सूजन नहीं रहेगी।
  नशे का प्रभाव हटाना :–यदि किसी ने अधिक नशा कर लिया हो और शराब पीकर झूमने-गिरने लगा हो तो उसके नशे को उतारने के लिए आधा तोला फिटकरी पानी में घोलकर, नशा करनेवाले को पिला दें, नशा उतर जाएगा।
 
हाथों में पसीना आना :- यदि हाथों में अधिक पसीना आता हो, हाथ गीले हो जाते हों, पाँव के तलवों में भी पसीना आता हो, तो ऐसे में पानी में फिटकरी का घोल बनाएँ, इस घोल से पाँव तथा हाथ दिन में दो बार धीरे-धीरे धोएँ। यह समस्या नहीं रहेगी।
 
 खून बहना :-   यदि खून बह रहा हो और उसे रोकना हो व उसकी रफ्तार धीमी करनी हो, तो एक कप दही लें। दो कप पानी में मिलाएँ। अब इसमें दो चुटकी पिसी फिटकरी डालें, उसे मिलाकर पीने से रक्त बहना रुक जाएगा।
 मलेरिया से बचाव :– एक चुटकी फिटकरी और दो चुटकी चीनी मिलाएँ। इसे खिलाकर पानी पिलादें। इसका प्रभाव तभी होता है, यदि मलेरिया का बुखार आने से एक घंटा पहले दवा दे दें।
 प्रदर के कष्ट में :–प्रदर रोग में सफेद तथा रक्त वाला पानी गिर सकता है। फिटकरी वाला पानी तैयार करें। इसे पिचकारी के जरिए मूत्रांग के अंदर डालें। यदि ऐसा न कर पाएँ तो इससे मूत्रांग को गहराई तक अच्छी प्रकार धोएँ।  
अण्डकोष में भरा पानी :- 12 ग्राम माजूफल 6 ग्राम फिटकरी को पानी में पीसकर अण्डकोष पर 15 दिन लेप करने से अण्डकोष में भरा पानी सही हो जाता है।
मुँह में छाले होना :– यदि मुँह में छाले हो जाएँ और खाने-पीने में कठिनाई हो रही हो तो फिटकरी का पानी बनाकर दिन में दो बार गरारे करें।  
 बिच्छू के काटने पर :– बिच्छू अथवा किसी भी जहरीले कीड़े-मकोड़े द्वारा काटे जाने पर विष का प्रभाव कम करने के लिए, फिटकरी में पानी की कुछ बूंदें डालकर पेस्ट बनाएँ। इसका प्रभावी स्थान पर लेप करें।
पित्ती :– शरीर में होने वाली पित्ती होने पर, एक चम्मच फिटकरी को थोड़े से पानी में डालें, तीन खाने वाले पान के पत्ते लें फिटकरी वाले पानी में गिलाकर इन पतों को पीस लें | इस मिश्रण को पित्ती के चिकतों पर लेप करें, लाभ होगा।
मोच :– मोच आने पर पान के पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करें, फिर इसे मोच पर बांधे शीघ्र लाभ होगा।
 चोट या खरोंच :– यदि चोट से रक्तस्त्राव हो रहा हो तो घाव को फिटकरी के पानी से धोएं तथा घाव पर फिटकरी का चूर्ण बनाकर बुरकने से खून बहना बंद हो जाता है।
दमा और खांसी: – आधा ग्राम पिसी हुई फिटकरी को शहद में मिलाकर चाटने से दमा और खांसी में बहुत लाभ मिलता है।
खून की उलटी :– भुनी हुई फिटकरी 1-1 भाग सुबह-शाम पानी के साथ लेने से खून की उलटी बंद हो जाती है।
 दांतों के कीड़े:-  प्रतिदिन दोनों समय फिटकरी को गर्म पानी में घोलकर कुल्ला करें इससे दांतों के कीड़े तथा मुँह की बदबू खत्म हो जाती है।  
सर के जुएं :– एक लीटर पानी में १० ग्राम फिटकरी का चूर्ण घोल लें | इस घोल से प्रतिदिन सिर धोने से जुएं मिट जातें हैं।   दाँतो का दर्द :– दस ग्राम फिटकरी के चूर्ण में पांच ग्राम सेंधा नमक मिलाकर मंजन बना लें। इस मंजन के प्रतिदिन प्रयोग से दाँतो के दर्द में आराम मिलता है।
 मसूड़ों का शूजन :–भुनी फिटकरी,सेंधा नमक,काली मिर्च तथा हुरड़ का छिलका इन सबको १०-१० ग्राम की मात्रा में ले इन्हें अच्छी तरह कूट छाना लें प्रतिदिन सुबह-शाम इस मंजन को मसूड़ों पर मलने से मसूड़ों का ढीलापन, शूजन व दर्द खत्म हो जाता है।
 पलक के नीचे फूंसी :- आंखों में पलक के नीचे फूंसी के रूप में रोहे या कुकरे हो जाते हैं। पाँच ग्राम फिटकरी और पाँच ग्राम सुहागा पीस लें। इसी में सवा-डेढ़ ग्राम कलमी शोरा मिला लें। इसे कपड़छन कर लें। इस दवा को आंख में लगायें। आंखों में तीखी छटपटाहट होगी। आंखों में छम-छम पानी बहेगा, किन्तु घबरायें नहीं। यह दवा आंखों को नुकसान नहीं देगी। पानी के साथ कुकरे या रोहे गलकर बह जायेंगे। बड़ों को एक रत्ती और बच्चों को आधा रत्ती दवा ही बहुत है।  
>>>  गुलाब अर्क में शुद्ध रसौत, फिटकरी का फूला, सेंधा नमक और मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर बारीक वस्त्र से छानकर बूंद-बूंद नेत्रों में डालने से लाभ होता है।
 आंखों की लाली :- एक छोटा चम्मच शहद में रत्ती फूली फिटकरी का महीन चूर्ण मिलाकर आंखों में सलाई से लगायें, आंखों की लाली छंट जायेगी।  
 
 आंखों की जलन :– फिटकरी का बारीक चूर्ण एक रत्ती, जरा-सी दूध की मलाई मिलाकर पलकों पर लेप कर दें और सो जायें। सुबह तक आंखों की जलन ठीक हो जायेगी।
 
आंखें साफ़ करना :– फिटकरी के बारीक चूर्ण में हल्की-सी परत सलाई में लेकर आंखों में लगा दें फिर गुलाबजल की दो-दो बूंदें ड्रापर से डालें। रात को जलन शान्त होगी और आंखें निर्मल स्वच्छ हो जायेंगी।
 
आंखें का दु:खना :– पाँच-सात बूंद पानी में सफेद फिटकरी घिस लें फिर सलाई से आंखों में लगायें । लाली व धूल की गन्दगी पानी बनकर बह जायेगी। रात को देर तक पढ़ना व T.V. देखने से आंखें दु:खती हैं, वह भी ठीक हो जायेंगी।
आंखों में गर्मी से जलन :– गर्मी की वजह से आंखों में दर्द हो तो फिटकरी को मलाई के साथ फेंटकर किसी कपड़े पर लगाकर आंखों पर थोड़ी देर लगा रहने दें।
आंखों की रोशनी :– आंखों की रोशनी के लिये काली मिर्च का चौथाई चम्मच चूर्ण एक चम्मच शुद्ध घी तथा आधा चम्मच पिसी हुई मिश्री के साथ सवेरे तथा रात को शयन से पूर्व लेना उचित रहता है।  
 लिंग अथवा योनि में खारिश : – यदि पुरुषों को लिंग में तथा नारियों को योनि में खारिश रहने लगी हो तो गर्म पानी में फिटकरी मिलाएँ। इससे उन अंगों को अच्छी प्रकार धोएँ, खारिश खत्म होगी।
>>> कैमिस्ट से डिस्टिल वाटर लायें, उसमें पाँच-पाँच ग्राम फिटकरी और कलमी शोरी डालें । कुछ देर में वह पिघलकर पानी बन जायेंगे, ड्रापर से दो-दो बूंदें सुबह-शाम डालें।
गले की खराश :- दस ग्राम अनार के छिलके सौ ग्राम पानी में उबालें, इसमें दो लौंग भी पीसकर डाल दें। जब पानी आधा रह जाये तब थोड़ी-सी फिटकरी डाल दें। गुनगुने पानी से गरारे करें। गले की खराश मिट जायेगी। 
    >>> 10 ग्राम फिटकरी तवे परं भूनकर पीस लें। एक-एक ग्राम की दस पुड़ियाँ बना लें। दूध के साथ दिन में तीन पुड़ियाँ फाँक लें। इससे गला फेफड़े, श्वास नली और ब्रोंकाई के सारे घाव भर जायेंगे। कफ जम जाने के कारण थूक के साथ खून आ रहा होगा तो वह भी बन्द हो जायेगा। दूध-चाय, चिकनाई, तम्बाकू, खटाई, लाल मिर्च आदि का परहेज रखें।
 गले में सूजन :– गर्म पानी में फिटकरी घोलकर चुटकी भर नमक डालें। सुहाते गर्म पानी से गले में अन्दर तक गरारे करें। गले में सूजन, दर्द, टाँसिल, फूला हुआ आदि सब मिट जायेगा।
 खाज खुजली :– नींबू में थोड़ा फिटकरी का पाउडर भरें। उसे खाज वाले अंगों पर रगड़ें।खाज, खुजली, दाद, फुसियाँ, फोड़े धीरे-धीरे ठीक होने लगेंगे।
 

आइये जाने फिटकरी के  दुष्प्रभाव।

फिटकरी का प्रयोग हम ज्यादातर बाहरी रूप में ही करते है जो हानिरहित है , किंतु अगर इसका रोगनिवारण हेतु आंतरिक प्रयोग करना हो तो उचित वैधकीय परामर्श और देख-रेख में ही करना चाहिये ।
अनुचित मात्रा में सेवन करने पर यह फेफड़े, आँतों और पेट को हानि पहुचा सकता है ।
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