खस

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खस परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

परिचय :-   खस के बारे में अनेक लोगों को अधिक जानकारी नहीं है, इसलिए शायद आप भी खस के अधिक नहीं जानते होंगे। खस का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। खस के तेल से साबुन, इत्र आदि बनाये जाते हैं।

खस औषधीय  गुण :-  उल्टी, जलन, शुक्राणु विकार, पित्त विकार, सिरदर्द, रक्त विकार, पेशाब की जलन, आदि में खस से लाभ लिया जा सकता है। इसके साथ ही खस के फायदे आंखों के रोग, बुखार आदि में भी मिलते हैं।

खस का औषधीय प्रयोग

ज्वार रोगों में:- खस,  सोंठ,  छोटी तथा बड़ी कटेरी एवं देवदारु इन सब को आधा आधा तोला ले कर काढा बनाए| यह काढ़ा सब प्रकार के ज्वाररोगों में दोषों को पचाता है| यह पाचन काढ़ा है |  काढा पिलाते समय रोगी को उत्तर अथवा पूर्व दिशा को मुंह करके बैठना चाहिए| काढ़ा पिलाने के बाद रोगी को लिटायें तथा 1 घंटे तक पानी ना दें|

अत्यधिक प्यास लगने की समस्या में :-  अत्यधिक प्यास लगने की परेशानी में 2-4 ग्राम खस की जड़ को मुनक्का के साथ पीसकर पिलाएं। इससे अधिक प्यास लगने की परेशानी खत्म होती है।

आंखों में जलन :- गर्मी में आंखों में जलन और इनके लाल होने की समस्या अक्सर बढ़ जाती है. ऐसा तभी होता है जब शरीर के भीतर गर्मी बढ़ जाती है. इससे निजात पाने के लिए आप रोजाना खस के शर्बत का इस्तेमाल कीजिए. आंखों के लाल होने और जलन की समस्या आसानी से दूर हो जाएगी.

अधिक पसीना आने की परेशानी :-  आपको बहुत अधिक पसीना आता है तो खस की जड़ का बारीक चूर्ण बना लें। इसे शरीर पर लेप करें। इससे अधिक पसीना आने की समस्या का समाधान होता है।

दर्दनिवारक :- खस का तेल दर्द से राहत पाने के लिए किया जाता है क्योंकि इसका एन्टी-इंफ्लैमटोरी गुण मांसपेशियों के सूजन को कम करने में सहायता करता है और हड्डियों को मजबूत करता है।

सूजन :- खस के प्रयोग से सूजन जैसी बीमारी में भी लाभ हो सकता है। 10-40 मिली मात्रा में खस का सेवन करें। इससे सूजन की समस्या ठीक हो जाती है।

बालों का झड़ना :- खस में मिनरल जैसे कैल्शियम होता है जो बालों का झड़ना कम करके नए बाल उगाने में मदद करते हैं। खसके इस्तेमाल से बाल शाइनी और हेल्दी बनते हैं। नारियल तेल में खस डालकर उसको अच्छी तरह से तेल में मिला लें। उसके बाद स्कैल्प में लगायें। बेहतर परिणाम के लिए इसको हफ़्ते में तीन बार इस्तेमाल कर सकते हैं।

उल्टी :- उल्टी पर रोक लगाने के लिए बराबर-बराबर की मात्रा में मूंग, पिप्पली, खस तथा धनिया का 5-10 ग्राम चूर्ण बना लें। इसे 6 गुना पानी में रात भर के लिए भिगो दें। सुबह छानकर पीने से पित्तज विकार के कारण होने वाली उल्टी ठीक हो जाती है।

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