नीम -Neem परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

नीम -Neem परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

नीम -Neem परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

नीम -परिचय (Neem Introduction)

आयुर्वेद में नीम को बहुत ही उपयोगी पेड़ माना गया है। इसका स्वाद तो कड़वा होता है  लेकिन नीम जितनी कड़वी होती है, उतनी ही गुणकारी होती है । इसके गुण अनेक और बहुत प्रभावशाली है।  नीम के बारे में कहा जाता
है की एक नीम और सौ हकीम दोनों बराबर है। आज के समय में बहुत सी एलोपैथिक दवाइयां नीम की पत्ती व उसकी छाल से बनती है ।  हमारे देश में नीम का पेड़ घर
में लगाना शुभ माना जाता है। नीम हमारे लिए
अति विशिष्ट व पूजनीय वृक्ष है। भारत में एक कहावत प्रचलित है कि जिस धरती पर नीम के पेड़ होते हैं, वहाँ मृत्यु और बीमारी कैसे हो सकती है। अब तो अन्य देश भी इसके गुणों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। यह स्वाद में भले ही कड़वा हो, लेकिन इससे होने वाले लाभ अमृत के समान होते हैं। नीम एक तेजी से बढ़ने वाला पर्णपाती पेड़ है, जो लगभग 50-65 फुट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है और कभी-कभी 115-131 फुट  तक भी ऊंचा हो सकता है। इसकी
शाखाओं का प्रसार व्यापक होता है। सूखे में इसकी अधिकतर या लगभग सभी पत्तियां झड़ जाती हैं। इसकी छाल कठोर, विदरित (दरारयुक्त) या शल्कीय होती है और इसका रंग सफेद-धूसर या लाल, भूरा भी हो सकता है। रसदारु भूरा-सफेद और अंत:काष्ठ लाल रंग का होता है जो वायु के संपर्क में आने से लाल-भूरे रंग में परिवर्तित हो जाता है। 8 से 16 इंच तक लंबी प्रत्यावर्ती पिच्छाकार पत्तियां जिनमें, 20 से लेकर 31 तक गहरे हरे रंग
के पत्रक होते हैं जिनकी लंबाई 1 से 3 इंच  तक होती है।  इनके किनारे आरी की भाँति दंतीय होते हैं। फूल सफेद और सुगन्धित होते हैं और एक लटकते हुये पुष्पगुच्छ जो लगभग 8-10 इंच तक लंबा होता है में सजे रहते हैं। इसका फल चिकना गोलाकार से अंडाकार होता है और इसे निंबोली कहते हैं। फल का छिलका पतला तथा गूदा रेशेदार, सफेद पीले रंग का और स्वाद में कड़वा-मीठा होता है। गूदे की मोटाई 0.3 से 0.5 सेमी तक होती है। गुठली सफेद और कठोर होती है जिसमें एक या कभी-कभी दो से तीन बीज होते हैं जिनका आवरण भूरे रंग का होता है।
       भारत में नीम की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश में तत्पश्चात क्रमशः तमिलनाडू, कर्नाटका, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रेदश, गुजरात, पंजाब, पश्चिम बंगाल, राजस्थान आदि प्रदेशों में पायी जाती है। यह मुख्यता: मैदानी भाग, सड़कों के किनारे, खेतों की मेड़ों पर, गांवों के आसपास एव पड़ती भूमि में प्राकृतिक रूप से ही पाया जाता है। परंतु अब यह सम्पूर्ण भारत में उगाया भी जाने लगा है। सामान्य रूप से यह सड़कों के किनारे वृक्षों से आच्छादित मार्ग बनाने के लिए उगाया जाता है। इसके बढ़ती उपयोगिता देखते हुए अब वैज्ञानिक/तकनीकी पद्धति से पौधारोपण करने की आवश्यकता पर
बल दे रहे है।
 

 नीम -Neem विभिन्न भाषाओं में नाम :- 

भारतीय उप-महाद्वीप मूल का वृक्ष होने के कारण हिंदी नाम, नीम ही सारे विश्व में प्रचलित है।नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, ‘श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।’    इसका वानस्पतिक नाम Azadirachta indica है। 

 नीम के औषधीय गुण:-Neem in Medicinal Properties 

   ग्रन्थ में नीम के गुण के बारे में चर्चा इस तरह है :-

निम्ब शीतों लघुग्राही कतुर कोअग्नी वातनुत।
अध्यः श्रमतुटकास ज्वरारुचिक्रिमी प्रणतु ॥
अर्थात् नीम शीतल, हल्का, ग्राही पाक में चरपरा, हृदय को प्रिय,अग्नि, वाट, परिश्रम, तृषा, अरुचि, क्रीमी, व्रण, कफ, वामन, कोढ़ और विभिन्न प्रमेह को नष्ट करता है।    नीम के गुण  जैसे वायरस रोधी, क्षय रोग नाशक, वैक्टीरिया नाशक, फफूंदी नाशक, अमीबा नाशक, फोड़ा/जहरबाद नाशक, खाज/खुजली नाशक, सूजन विरोधी, पाइरिया नाशक, चर्मरोग नाशक, मूत्रवर्धक, ह्रदय संबंधी, कीट नाशक, कीट डिंबनाशक, सूत्र कृमिनाशक, मछिली नाशक और इसके योगिकों के अन्य जैविक क्रियाओं के कारण उत्पति एवं औषधीय रूप से इसे बहुउपयोगी माना गया है| अत: इसे कल्पवृक्ष या देव वृक्ष भी कहा जाता है।
 

नीम – विभिन्न रोगों में उपचार (Neem in Treatment of various diseases)

     यहां हम आपको नीम के गुण और उसके लाभ के बारे में बता रहे हैं । जिसे आप घर में ही उपयोग कर बहुत बीमारियों का उपचार कर सकते हैं ।
खुजली होने पर :-  आप नीम के पानी से स्नान कर लें। नीम के पानी से नहाने से खुजली की समस्या से राहत मिल जाएगी। आप कुछ नीम की पत्तियों को लेकर उन्हें पानी में डालकर कर पानी को अच्छे से उबाल लें। फिर आप इस पानी से नीम की पत्तियों को निकाल दें और इस पानी को नहाने वाले पानी में मिला दें। रोज इस पानी से नहाने से आपको कई तरह के चर्म रोगों से लाभ होता है।
 
  • नीम और मेहंदी के पत्ते एक साथ रगड़ कर रस निकालें और 25 ग्राम की मात्रा में पी जाएं बाकी बचे अंश को नारियल के तेल में भूनकर छान लें यह तेल बदन पर मले कई तरह के चर्म रोगों से लाभ होता है।
  • आप नहाने से पहले अपने बदन पर नीम का लेप लगा कर कुछ वक्त तक सूखने दें, फिर उसको पानी से धो डालें।
 
मलेरिया बुखार होने पर :-  नीम मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों को दूर रखने में अत्यन्त सहायक है। जिस वातावरण में नीम के पेड़ रहते हैं, वहाँ मलेरिया नहीं फैलता है। नीम के पत्ते जलाकर रात को धुआं करने से मच्छर नष्ट हो जाते हैं।
  • मलेरिया बुखार होने की स्थिति में नीम की छाल को पानी में उबालकर, उसका काढ़ा बना दिन में तीन बार, दो बड़े चम्मच भरकर पीने से लाभ होता है।
  • नीम के छिलके 15 ग्राम, काली मिर्च 7 नग को पिस कर पानी के साथ सेवन करें।
  • नीम की छाल के काढे में धनिया और सौंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मलेरिया रोग में जल्दी लाभ होता है। 
 

ज्वर :- नीम की साफ पत्तियाँ 10 ग्राम और भूनी हुई फिटकरी 5 ग्राम को पानी के साथ पीसकर गोलियां बना लें, ज्वर आने के दो घंटे पूर्व एक गोली और फिर एक घंटे बाए एक गोली लेने से ज्वर रूक जाता है।

विषैले कीटों द्वारा काट लेने पर :- नीम के पत्तों को महीन पीस कर काटे गए (स्थान पर उसका लेप करने से आराम मिलता है और जहर भी नहीं फैलता।
 
  • नीम के कुछ पत्तों को लेकर उन्हें अच्छे से पीस लें और फिर इसका लेप को उस स्थान पर लगा लें जहां पर कीड़े ने आपको काटा है। ऐसा करने से आपके शरीर में जहर नहीं फैल पाएगा।
 
 घाव हो जाने पर :-   नीम के कुछ पत्तों को लेकर उन्हें अच्छे से पीस कर उसका  लेप लगाने से काफी लाभ मिलता है।
  • चोट लगने पर आप चोट वाले स्थान पर नीम और जैतून के तेल का लगा लें।
  • इन दोनों चीजों को एक साथ लगाने से भी चोट का घाव जल्द ही भर जाएगा। आप बस थोड़े से नीम के पत्ते लेकर उन्हें पीस लें और इसमें जैतून का तेल मिला लें। फिर आप इस लेप को घाव वाले स्थान पर लगा लें।
  • जैतून के तेल के साथ नीम की पत्त‍ियों का पेस्ट बनाकर लगाने से नासूर भी ठीक हो जाता है।
  • नीम के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर शरीर पर मालिश करने से त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं।
पत्थरी :- गुर्दे में पत्थरी होने की स्थिति में नीम के पत्तों की राख को 2-3 ग्राम मात्रा में लेकर, प्रतिदिन पानी के साथ लेने पर पथरी गलकर मूत्रमार्ग से बाहर निकल जाती है।
नीम के पत्तों से उल्टियों का इलाज :- उल्टियां 20 ग्राम Neem की पत्तियां पीसकर पानी में घोलने और आधा कब तैयार करके दिला दें उल्टी किसी भी कारण से आ रही हो बंद हो जाएगी पांच दाने कालीमिर्च के भी मिला लेनी चाहिए।
जल जाने पर :-  अगर आप खाना बनाते वक्त या किसी दूसरे कारण से अपना हाथ जला बैठी हैं तो तुरंत उस जगह पर नीम की पत्तियों को पीसकर लगा दे। 
कान दर्द में :- यदि आपके कान में दर्द हो तो नीम का तेल प्रयोग करना काफी लाभप्रद रहेगा।
 
पायरिया की बीमारी :- नीम की दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
  • नीम के दातुन से दांत मजबूत होते हैं और पायरिया की बीमारी भी समाप्त होती है।
चेचक में :-   तीन माशा नीम की कोपलों को 15 दिन तक लगातार खाने से 4 महीने तक चेचक
नहीं निकलती, यदि निकलती भी है आंखे ख़राब नहीं होती है।
 
  • नीम का बीज, हल्दी और बहेड़ा को बराबर मात्रा में लेकर शीतल जल में पीसकर, छानकर कुछ दिनों तक नियमित पीने से शीतला (चेचक) निकलने का डर नहीं रहता है।
दंत मंजन :-  नीम का प्रयोग कई तरह के टूथपेस्ट को बनाने में भी किया जाता है। इसमें मौजूद औषधीय गुण मसूड़ों और दांतों को मजबूत बनाए रखते हैं। इसलिए जिन लोगों के मसूड़ों में दर्द रहता है या मुंह से बदबू आती है वो लोग नीम से दातून किया करें।
  • नीम की लकड़ी के कोयले को बारीक़ पीसकर दांतों पर मलें।
  • नीम की दातुन करने से दांत और मसूड़े स्वस्थ रहते हैं।
  • नीम के दातुन से दांत मजबूत होते हैं और पायरिया की बीमारी भी समाप्त होती है।
  • नीम की छाल बबूल की छाल, मैलसिरी के बीज, सुपारी जली, बादाम के छिलके जले हुए प्रत्येक 50 ग्राम, खरिया मिट्टी, 100 ग्राम बहेटा 20 ग्राम, काली मिर्च 3 ग्राम, लौंग 6 ग्राम और पिपरमिंट 1 ग्राम सबको पीसकर छानकर रख लें इसको  मंजन की भाँति प्रयोग करने से दातों की पीड़ा, पानी लगना, पीव आना आदि रोग दूर होते  है।

मधुमेह में :- मधुमेह(डायबिटीज) के रोगियों के लिए भी हर दिन नीम की एक छोटी-सी गोली खाना बहुत फायदेमंद होता है। यह उनके अंदर इंसुलिन पैदा होने की क्रिया में तेजी लाता है।

कील मुहांसे होने पर :- चेहरे पर कील मुहांसे होने पर आप नीम का पेस्ट बनाकर उसे चेहरे पर लगा लें कील मुहांसे आदि दूर होते  है।
 

बवासीर में :-  आधा चम्मच नीम का तेल प्रतिदिन पीने से लगभग दो सप्ताह में ववासीर ठीक हो जाता है।

  • नीम की गुठली की गिरी 50 ग्राम लेकर अच्छी प्रकार कूट कर व मिलाकर जंगली बेर के समान गोलियां बना लें। एक गोली प्रतिदिन प्रात: के समय पानी के साथ एक माह तक निरंतर खायें। बवासीर के कष्ट में आराम आएगा।
  • नीम की गिरी, मूसब्वर, रसौत-तीनों चीजें बराबर मिलाकर छोटी-छोटी गोली बना लें। प्रात: काल एक गोली मठ्ठा के साथ कुछ दिन लेने से आराम मिलता है।
  • नीम की अंतरछाल 5 ग्राम और गुड 10 ग्राम मिलाकर लेना लाभकारी होता हैं।

बालों पर लगाने से बालों में :- नींबोली (नीम का छोटा सा फल) और उसकी पत्तियों से निकाले गये तेल बालो में लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं

  • नीम का पेस्ट बालों पर लगाने से बालों में चमक भी आ जाती है और बाल मजबूत बने रहते हैं।
नीम की पत्तियों को अलमारी में रखा जाता है ताकि कपड़े कीटों से बचे रहें।
इन्हे गेहूं या चावल आदि भरने से पहले ड्रम या पीपे आदि में नीचे बिछाया

सावधानी :
अगर आप किसी बीमारी के इलाज के लिए नीम का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें। 

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