पिप्पली-Piper परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

पिप्पली-Piper परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

परिचय :-  पिप्पली को पीपर भी कहते हैं, यह छोटी और बड़ी दो प्रकार की होती है, जिनमें से छोटी ज्यादा गुणकारी होती है और यही ज्यादातर प्रयोग में ली जाती है। पिप्पली के फल कई छोटे फलों से मिल कर बना होता है, जिनमें से हरेक एक खसखस के दाने के बराबर होता है। ये सभी मिलकर एक हेज़ल वृक्ष की तरह दिखने वाले आकार में जुड़े रहते हैं। चरक संहिता में वर्णित कासघ्न गण के अन्तर्गत 10 द्रव्य हैं उनमें पिप्पली का उल्लेख है।

द्राक्षाभयामलकपिप्पलीदुरालभाश्रृंगिकंटकारिका

वृश्चिरपुर्नवातमलक्येतिदशेमानि कासहराणि भवन्ति।

विभिन्न भाषाओं में इसके नाम इस प्रकार से हैं: संस्कृत पिप्पली, हिन्दी- पीपर, पीपल, मराठी- पिपल, गुजराती- पीपर, बांग्ला- पिपुल, तेलुगू- पिप्पलु, तिप्पली, फारसी- फिलफिल। अंग्रेज़ी- लांग पीपर, लैटिन- पाइपर लांगम ( Piper longum)

पिप्पली कृकरा शौण्डी चपला मागधी कणा।
कटुबीजा च कोरडूगी वैदेही तिक्ततण्डुला।
पिप्पली, मागधी, वैदेही, कृष्णा,चपला, तीक्ष्ण तंडुला, उषणा, उपकुल्या, शौण्डी, कोला। यह सब पिप्पली के संस्कृत नाम है।

पिप्पली के गुण :-   सोंठ रुचि कारक, आमवातनाशिक, पाचक, चरपरी, हल्की, स्निग्ध, उष्ण, पाक में मधुर, कफ, वात तथा मल के बन्ध को तोड़ने वाली है। वीर्य वर्धक, स्वर को उत्तम करने वाली, बामन, स्वास, शूल, खांसी, सर्दी के रोग, ह्रदय रोग, श्लीपद, शोथ, आगाह, उदररोग और बात के रोगों को नष्ट करने वाली होती है।
कच्ची अवस्था में यह कफकारी, स्निग्ध, शीतल, मधुर, भारी और पित्तशामक होती है, लेकिन सूखी पीपर पित्त को कुपित करती है। शहद के साथ लेने पर यह मेद, कफ, श्वास, कास और ज्वर का नाश करने वाली होती है। ग़ुड के साथ लेने
पर यह जीर्ण ज्वर (पुराना बुखार) और अग्निमांद्य में लाभ करती है तथा खांसी, अजीर्ण, अरुचि, श्वास, हृदय रोग, पाण्डु रोग और कृमि को दूर करने वाली होती है। पीपल के चूर्ण की मात्रा से ग़ुड की मात्रा दोगुनी रखनी चाहिए।

पिप्पली सेवन के लाभ :-

पिप्पली का अकेले अथवा संयुक्त प्रयोग करने से निश्चित ही स्वास्थ्य लाभ होगा। पिप्पली का घरेलू उपयोग सभी लोग करते हैं। लोगों को पिप्पली सेवन करने की उचित विधि का ज्ञान मिला तो घर घर में पिप्पली से स्वास्थ्य लाभ निश्चित ही मिलेगा।

पिप्पली क्वाथ :- पीपर 20 ग्राम जौकुट (मोटा-मोटा) कूटकर एक गिलास पानी में डालकर उबालें। जब आधा पानी बचे तब उतारकर छान लें। इस को तीन भाग करके ठण्डा ही दिन में 3 बार सुबह-दोपहर-शाम को एक चम्मच शहद डालकर पीने से पुराना बुखार, तिल्ली बढ़ जाना और वात प्रकोपजन्य व्याधियों को शीघ्र दूर करता है।

  • इस काढ़े के 4-4 चम्मच की मात्रा बकरी के दूध के साथ, दिन में तीन बार लेने से पुरानी पेचिश भी ठीक हो जाती है।

पिप्पल्यादि चूर्ण :-  पिप्पली, नागरमोथा, काकड़ासिंगी, अतीस, चारों द्रव्य 50-50 ग्राम लेकर, कूट-पीसकर बारीक चूर्ण कर लें। इस चूर्ण को सुबह-शाम चौथाई चम्मच मात्रा में थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से बच्चों को ज्वर, अतिसार, पेचिश, वमन, सर्दी-जुकाम और खांसी आदि व्याधियों से छुटकारा मिलता है। यह बच्चों के लिए एक सौम्य और निरापद औषधि है। अतः निर्भयतापूर्वक बच्चों को दी जा सकती है।

कृष्णादि चूर्ण :- पिप्पली, पद्माख, लाख और छोटी कटेली, सब 50-50 ग्राम के कूट-पीसकर महीन चूर्ण को आधा चम्मच, शहद में मिलाकर सुबह-शाम लेना चाहिए। कफ, कास, ज्वर और उरःक्षत, कफ के साथ रक्त जाना, कफ पीले रंग का और दुर्गन्धयुक्त कफ निकलना आदि व्यधियों को शीघ्र दूर करता है।

64 प्रहरी पिप्पली :- पिप्पली को अच्छा साफ करके 64 प्रहर तक खरल में घोंटने पर 64 प्रहरी पीपर तैयार होती है। इसकी मात्रा 2 से 4 रत्ती है और इसे पुराने बुखार, श्वास, कास, वात प्रकोप और भूख कम होना आदि व्याधियों में दिन में दो बार शहद में मिलाकर दे। इसके सेवन से शरीर में ऊर्जा का संचार होगा। यह पाचक और कफ का नाश करती है।

पाचक :- नीबू के रस में पीपर और थोड़ा सा पिसा सेंधा नमक डालकर इसे 7 दिन तक रखें। आठवें दिन पीपर निकालकर सुखा कर चूर्ण करें सुबह शाम 2-2 पीपर जितना खाने से अपच, अरुचि, कब्ज और मन्दाग्नि दूर होगी तथा खाया-पिया हजम होगा।

पिप्पली पाक :- पीपर 100 ग्राम का महीन चूर्ण 2 लीटर गाय के दूध में डालकर तब तक धीमी इंच पर उबाले कि इसका मावा बना जाये। अब इस मावे में 100 ग्राम घी डालकर अच्छा गुलाबी होने तक सेकें। फिर आधा किलो शकर की चाशनी बना उसमें मावा मिलाकर थाल में जमा लें। जम जाए तब लगभग 10-15 ग्राम की बर्फी काट लें। सुबह खाली पेट और रात को भोजन के 2 घण्टे बाद, 1-2 बर्फी के टुकड़ों को खूबचबा-चबाकर खाएं और साथ में मीठा गर्म दूध घूंट-घूंट करके पीते रहें। इस प्रयोग से पाचन शक्ति प्रबल होगी तथा पेट, साफ रहेगा, कब्ज होगी नहीं, अच्छी भूख लगेगी, हाजमा अच्छा रहेगा और शरीर सुडौल और बलवान होगा।

पेट दर्द :- पीपर का चूर्ण और दुगुना सेंधा नमक छाछ के साथ दिन में 3 बार लेने से उदर की वायु निकल जायेगी और पेट हलका होगा व अच्छा शौच होगा जिससे तबीयत प्रसन्न रहेगी।

कफज कास :- घी में भूनी पिप्पली का चूर्ण आधा चम्मच थोड़ा सा सेंधा नमक और एक चम्मच शहद तीनों मिलाकर सुबह-शाम लेने से कफज खांसी ठीक होगी।

बवासीर :- पीपर चूर्ण आधा चम्मच, जीरा भुनकर पिसा हुआ एक चम्मच और जरा सा सेंधा नमक तीनों को मिलाकर, छाछ के साथ, सुबह-शाम दो माह तक लेने से कैसी भी बवासीर हो, ठीक हो जाती है।

दांत निकलना :- शिशु के दांत आसानी से निकलें, इसके लिए चुटकी भर पीपर चूर्ण शहद में मिलाकर, इसे शिशु के मसूढ़ों पर लगाये।

मोटापा :- पीपर का चूर्ण आधा चम्मच, थोड़े से शहद में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से 2-3 माह में मोटापा कम होने लगता है।

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