Pit Papra

Pit Papra

पित्तपापड़ा परिचय, गुण धर्म और औषधीय प्रयोग।

परिचय :-   गेंहूं के खेतों में पाए जाने वाले इस छोटे से पौधे की लम्बाई 5-20 सेमी के बीच होती है. इसकी पत्तियों छोटे आकार की होती हैं और इसके फूलों का रंग लाल व नीला होता है. सर्दियों के मौसम में ये गेंहूं के खेतों में ज्यादा पाए जाते हैं.

पित्तपापड़ा औषधीय  गुण :-  आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में पित्त या वात के प्रकोप से होने वाले बुखार से राहत दिलाने में इसका उपयोग किया जाता है. पर्पट के संदर्भ में कहा गया है कि – एक पर्पटक श्रेष्ठ पित्त ज्वर विनाशन, अर्थात पर्पट पित्तज्वर की श्रेष्ठ औषधि है। यह संग्राही, रुचिकारक, वर्ण्य, अग्निदीपक तथा तृष्णाशामक होता है। पर्पट रक्तपित्त, भम, तृष्णा, ज्वर, दाह, अरुचि, ग्लानि, मद, हृद्रोग, भम, अतिसार, कुष्ठ तथा कण्डूनाशक होता है। लाल पुष्प वाला पर्पट अतिसार तथा ज्वरशामक होता है।

पित्तपापड़ा का औषधीय प्रयोग

           आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार पित्तपापड़ा में ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो बुखार को जड़ से खत्म करने में मदद करते हैं. आइये जानते हैं कि बुखार से आराम पाने के लिए पित्तपापड़ा का उपयोग कैसे करें. 

ज्वार रोगों में :- पित्तपापड़ा, इलायची, दारुहल्दी, हल्दी, कचूर, सौठ, पौहकरमूल,  गिलोय, कुटकी, जवाखार, काकड़ा सिंगी, चिरायता, देवदारु,तथा दसमूला की 10 औषधियां इन कुल 23 औषधियों को बराबर बराबर 1-1 मासे लेकर काढे की तरकीब से काढ़ा बनाएं। फिर उनमें 3 अथवा 4 माशा पिसा हुआ सेंधा नमक डालकर सुहाता सुहाता पी जाए इसके पीने से सभी प्रकार के बुखार निश्चित रूप से दूर हो जाते हैं।

        >>> पित्तपापड़ा के 10-20 मिली काढ़े में 500 मिग्रा सोंठ चूर्ण मिलाकर पिएं. इसके अलावा पित्तपापड़ा और अगस्त के फूल के 10-20 मिली काढ़े में 500 मिग्रा सोंठ मिला कर सेवन करने से भी बुखार ठीक होता है।

        >>> नागरमोथा, पित्तपापड़ा, खस, लाल चंदन, सुंधबाला तथा सोंठ चूर्ण को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनायें. 10-20 मिली की मात्रा में इस काढ़े का सेवन करें. यह बुखार में होने वाली जलन, अधिक प्यास और पसीना आदि समस्याओं को दूर करता है।

        >>> बराबर मात्रा में गुडूची, आँवला और पित्तपापड़ा मिलाकर सेवन करने से या सिर्फ पित्तपापड़ा से बने काढ़े का 10-20 मिली मात्रा में सेवन करने से पित्तज्वर में आराम मिलता है।

       >>> बराबर मात्रा में गुडूची, हरीतकी और पर्पट का काढ़ा बनाकर 20-30 मिली मात्रा में सेवन करने से पित्त से होने वाले बुखार में लाभ मिलता है।

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